• Types Of Bank Loan In India लोन कितने प्रकार के होते हैं ? 2022

Bank loan kitne prakar ke hote Hain ?

दोस्तों आप सभी लोग यह तो जानते ही होंगे कि जब भी हमें अधिक पैसों की जरूरत होती है तो हमें किसी से कर्जा लेना होता है तभी हम अपनी आवश्यकताओं को पूरी कर सकते हैं जो कर्जा आप किसी भी बैंक या फाइनेंसियल इंस्टीट्यूट से ले सकते हैं या फिर लोन के द्वारा आप ली गई रकम को ब्याज सहित उस बैंक फाइनेंस इंस्टीट्यूट कोड वापिस दे सकते हैं तो आज हम आपको लोन के प्रकार के बारे में बताएंगे और आपको यह बताने का पूरा प्रयास करेंगे कि बैंक लोन कितने प्रकार के होते हैं।

 • यदि टाइम पीरियड के हिसाब से लोन के प्रकारों की बात की जाए तो तीन प्रकार के होते हैं।

1) (Short Term Loan) – इस लोन को वापस करने के लिए कम से कम 1 साल का समय दिया जाता है।

2) (Medium-Term Loan) – मीडियम टर्म लोन के पैसों को वापस करने के लिए कम से कम 1 साल से 3 या 5 साल का समय मिलता है।

3) (Long Term Loan) – इस लोन को लौटाने के लिए अधिक से अधिक 5 साल का समय दिया जाता है।

टाइप्स ऑफ बैंक लोन इन इंडिया के बारे में बात की जाए तो भारत में बैंक या फाइनेंस इंस्टीट्यूट कितने प्रकार के लोन प्रदान करती है।

Types of Bank Loans in India in Hindi

• 1) (Personal Loan) पर्सनल लोन

दोस्तों जैसा कि आपको नाम से ही पता चल रहा होगा कि पर्सनल लोन क्या होता है जब हम गैर जमानती लोन लेते हैं या अपनी किसी पर्सनल आवश्यकता की पूर्ति के लिए लोन लेते हैं तो उसे हम पर्सनल लोन कहते हैं जैसे आप अपने बच्चे की ही स्कूल की फीस को भरने के लिए या कोई महंगा उपहार खरीदने के लिए या घर का कोई सामान खरीदने के लिए किसी बैंक से किया फिर फाइनेंस इंस्टीट्यूट से कर्जा लेते हैं तो उसे पर्सनल लोन के अंतर्गत रखा जाता है।

दरअसल उनके लिए हमें बैंक में अपनी-अपनी ब्याज दर तय की जाती है आज के दौर में आपको स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर्सनल लोन के लिए 12.50% से 16.60% तक 1 साल की ब्याज वसूल कर रही है तो वहीं पर HDFC BANK 10.99% से 20.75% के द्वारा पर्सनल लोन पर ब्याज दर तय की गई है जो कि सभी लोगों से अधिक होती है पर्सनल लोन लेने के लिए बैंक आप से अधिक डॉक्यूमेंट नहीं मांगती है बस आपकी सैलरी सिर्फ को देखकर आपको लोन प्रदान करती है और आपको पर्सनल लोन कम से कम 5 साल के लिए मिल सकता है।

• 2) (Gold Loan) गोल्ड लोन

इस लोन के अंतर्गत आपको बैंक के लॉकर में अपने कोई सोने के जेवर को रखकर लोन की राशि आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है और गोल्ड की क्वालिटी और वैल्यू के अनुसार ही आपको लोन दिया जाता है वैसे आमतौर पर देखा जाए तो बैंक आप की गोल्ड की कीमत की 80% रकम आपको लोन के रूप में देती है।
गोल्ड लोन आपसे SBI बैंक में 11.15% और HDFC मे 10% सालाना वसूल किया जाता है

 • 3) (Security Loan) सिक्युरिटी पर मिलने वाला लोन

इस लोन में आपके बैंक द्वारा सिक्योरिटी पेपर रखे जाते हैं उसके बाद ही बैंक आपको लोन देती है लेकिन सवाल यह उठता है कि सिक्योरिटी पेपर क्या होते हैं यदि आपने पहले से ही कभी भी किसी म्यूच्यूअल फंड डिमांड शेयर गवर्नमेंट इस्कीमिया बांध में आपने कोई पहले ही निवेश किया होता है तो यही आपकी सिक्योरिटी पेपर होते हैं जिन्हें आप बैंक में जमा करके सिक्योरिटी लोन प्राप्त कर सकते हैं।

• 4) (Property Loan) संपत्ति लोन

प्रॉपर्टी लोन से आप को पता चल रहा होगा कि यह वह लोन होता है जिसमें बैंक आपके प्रॉपर्टी के कागजात को अपने पास गिरवी रखती है और यह लोन आपको अधिक से अधिक 15 साल के लिए मिल जाता है आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमत पर 40% से 50% तक का लोन मिल जाता है।

• 5) (Home Loan) होम लोन

घर खरीदने के लिए आप जो भी कर्जा लेते हैं उसे होम लोन के अंतर्गत रखा जाता है आप केवल गाड़ी खरीदने के लिए ही नहीं बल्कि घर को बनाने के लिए या रजिस्ट्रेशन स्टांप ड्यूटी का खर्चा कर सकते हैं और कई सारे खर्चे इसके अंदर जोड़े गए हैं बैंक घर बनाने के लिए कुल खर्च 70% से 85% तक का लोन देती है बाकी घर को बनाने के लिए पैसा का जुगाड़ आपको ही करना पड़ता है।

 • 6) (Education Loan) एजुकेशन लोन

यह हर किसी विद्यार्थी के लिए संभव नहीं होता है कि वह अपनी इच्छा के अनुसार इंस्टिट्यूट की पढ़ाई कर सकें कोई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहता है और वहां की फीस इतनी अधिक होती है कि वह चाह कर भी उस पढ़ाई के बारे में सोच नहीं सकता है तो ऐसी स्थिति में आप बैंक से एजुकेशनल लोन ले सकते हैं और एजुकेशनल लोन देने से पहले बैंक उसकी रीपेमेंट निर्धारित करती है।

बैंक से लोन को केवल उसी छात्र को देती है जिसे वापस करने की क्षमता होती है यदि वह छात्र उस लोन को वापस करने की क्षमता रखता है तो बैंकों से लोन दे देती है और यह काम 2 तरह से होता है या तो स्टूडेंट के गार्जियंस की इनकम को देखा जाता है या फिर यूनिवर्सिटी की परफॉर्मेंस देखी जाती है।
एसबीआई बैंक से एजुकेशनल लोन लेने पर 7.50 लाख से अधिक 10.70% और 7.50 लाख के लिए 9.95% ब्याज दर तय की गई है सालाना के हिसाब से।

• 7) (Car Loan) वाहन अथवा कार लोन

जब आप कोई भी वाहन खरीदने के लिए बैंक से कर्जा लेते हैं तो उसे वाहन या कार लोन कहते हैं कार लोन आपको फिक्स या फ्लोटिंग रेट पर दिया जाता है जिस समय आप लोन ले रहे हैं उसी समय ब्याज दर तय की जाती है और फ्लोटिंग रेट का अर्थ यह होता है कि लोन लेने के बाद ब्याज घटती बढ़ती रहती है। यानी लोन की ब्याज दर तय करने का मालिकाना बैंक के पास होता है।

 • 8) (Corporate Loan) कॉरपोरेट लोन

जब बड़े बड़े बिजनेसमैन रतन, टाटा, विजय माल्या, रिलायंस, इंडस्ट्रीज, टाटा बिरला जैसे बड़े-बड़े लोगों को लोन देती है वह कारपोरेट लोन की कैटेगरी में आता है।
अभी के नियमों के अनुसार बैंक अपनी कोर कैपिटल का 55% तक लोन किसी भी बड़ी कंपनी को लोन के रूप में प्रदान करती है लेकिन हाल ही में हुए डिफॉल्ट केस की बढ़ोतरी मध्य नजर रखते हुए आरबीआई के द्वारा कहा गया है कि 1 जनवरी 2009 तक ऐसा कोई भी नियम लागू हो जाएगा जब बैंक अपने कैपिटल का 25% किसी एक कारपोरेट कोलोन के रूप में दे सकती है।

 • निष्कर्ष

तो दोस्तों में इस पोस्ट के द्वारा बताया गया है Types of Bank Loans in India’ लोन कितने प्रकार की होती है तो अब आप जान चुकी है कि भारत में बैंक या फाइनेंस इंस्टिट्यूट कितने प्रकार के लोन प्रदान करती है तो उम्मीद करती हूं अब आप पूरी तरह से समझ गए होंगे और आपको संपूर्ण जानकारी मिल गई होगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ और बाकी लोगों के साथ जरूर शेयर करें ताकि अन्य लोग भी इसके बारे में जान सकें।

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